अकेला महसूस कर रहा हूँ
| अकेला महसूस कर रहा हूँ |
सपनों की चुमनेवाले मीनार
जोथा मेरे मनकी आंगन में
अकेले आगेया तलहटी पर,
एक सादा दिलकी तलास में
जो मिलती नहीं सहज में
oथक गया हूं प्रयास करकर।
संघनन तीब्र से तिब्रतर होता,
उदास दुःखी मनकी निच्चे
अकेला पनकी अंतरिक्ष में,
जलता जाता मेरे सारी सपने,
अपने ही आंख की सामने,
निर्बाक निर्ब देखते ही जाता।
ढेर सारी सपनो की बीजपत्र
खोलतेहुए,जब उठाया सर,
प्रेम, गर्मजोषीके कठिन शब्द
जिसे मैं खज रहाथा कहीं पर
अचानक देखा बिल्कुल वहीं,
पड़ा रहाथा मेरेही बिस्तर पर।
दिन का संदेह आज बुख़ारग्रस्त,
समय की प्रतिकूल गति के साथ
अब थक गया हूं, बुरा है हालात
सुंदर सबुजिमा लगता अतिभारित,
रंग भरा बसंत जैसे होता परिबर्तन
दारूण दुःख दाई समयके साथ।
इंच बड़ा चरम निराशा छागया,
समस्या की अटूट धारा बहगया
ऐसे सारे सम्भाबनाओं की आशा,
मेरे दिल से उतरकर चूर होगेया,
जो तुमसे ही मेरे मै भराया गया
बतादो,छिपजाना क्या ठीक हुआ।
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